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जानिए सरगोशी किसे कहते है और क़ुरआन में सरगोशी करने वालों को क्या नसीहत दी गई है ? ज़रूर पढ़ें

जानिए सरगोशी किसे कहते है और क़ुरआन में सरगोशी करने वालों को क्या नसीहत दी गई है ? ज़रूर पढ़ें

क़ुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :
ऐसी सरगोशी ( ख़ुफ़िया मशवर ) सिर्फ शैतान की तरफ से है जो के मुसलमानों को रंग में मुब्तला कर दे और वह अल्लाह की मशिययत व इरादे के बगैर मुसलमानों को कुछ भी नुक्सान नहीं पहुंचा सकता और मुसलमानों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए ।

[ सुर – ए – मूजदाला 58: 10 ]

( सिर्फ पांच मिनट का मद्रसा सफा 680 )

सरगोशी करने से माना फ़रमाया गया है जब आप किसी महफ़िल में बैठे हो या कही कुछ लोगों के साथ बैठे हूँ फिर उनमे से आप किसी एक के साथ उसके पास बैठ कर सिर्फ उसी से बात करने लगे और खुफियां बातें करने लगे तो ये अख़लाक़ीयत के खिलाफ अमल है और गलत भी है

जब आप लोगों के साथ बैठे हो तो किसी एक के साथ खुफियां मश्वरा या कोई बात न करें जो भी बात हो उसे सब के सामने करें और ऐसा न कर सकते हूँ तो खामोश रहे पर इस तरह का अमल करने से परहेज़ करना करें ।

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