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जानिए अल्लाह को याद करने और उसका ज़िक्र करने वाले शख्स की फ़ज़ीलत और सवाब के बारे में ?

जानिए अल्लाह को याद करने और उसका ज़िक्र करने वाले शख्स की फ़ज़ीलत और सवाब के बारे में ?

अल्लाह का ज़िक्र और याद करने वालो की फ़ज़ीलत…

महफूम -ए-हदीस :
अबू हुरैरह (रज़िअल्लाहु अन्हु ) और अबू सईद करी (रज़िअल्लाहु अन्हु ) दोनों हज़रात इस बात की गवाही देते है के ,
रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ) ने इरशाद फ़रमाया ,

“जो जमात अल्लाह तआला के ज़िक्र में मशगूल हो फ़रिश्ते इस जमात को घेर लेते है , रेहमत इन् को ढांप लेती हैं सकैना इन् पैर नाज़िल होती है और अल्लाह तआला इन का तज़कराह फ़रिश्तो की मजलिस में फरमाता है ।”

(मुस्लिम शरीफ)

एक और हदीस में नबी करीम सल्ल० ने ये भी फ़रमाया के “जो अल्लाह तआला को याद करता है अल्लाह तआला उसको याद करता है” और हमेशा हर मुश्किल में अल्लाह तआला साथ होता है अल्लाह के ज़िक्र से दिलों को सुकून हासिल होता है अल्लाह की याद से इंसान को उसकी ज़िन्दगी में चैन व करार मिलता है अल्लाह तआला की याद से इंसान की ज़िदगी की परेशानी और मुश्किलें दूर हो जाती है । देखिये एक और हदीस जिसमे अल्लाह तआला के ज़िक्र करने वाले की क्या फ़ज़ीलत और मर्तबा अल्लाह तआला ने दिया है …

मफ़हूम-ए-हदीस:
रसूलुल्लाह सल्लसल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने फ़रमाया :
” अल्लाह तआला के आख़िरत के दिन फरमाएगा के दोज़ख से हर उस ( मोमिन ) शख्स को निकाल लो , जिस ने मुझे कभी याद किया हो , या किसी जगह मुझ से डरा हो । ”

[ तिर्मिज़ी : 2514 , अन अनस रज़ि० ]

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