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गैर मजहब के लड़कों और लड़कियों से रिश्ता रखना और शादी करने के बारे में क़ुरआन क्या हुक्म देता है ? जानिए

गैर मजहब के लड़कों और लड़कियों से रिश्ता रखना और शादी करने के बारे में क़ुरआन क्या हुक्म देता है ? जानिए

मेरी बहने ये पोस्ट ज़रुर पढ़े जो गैर मजहब के लडको से रिश्ता रखती है और कुछ बहने तो जानते हुए भी कहती है की क्या करे दील के आगे हम मजबूर है । तो क्या वो दील रोजे कयामत आयेगा आपको बचाने…?

क़ुरआन में अल्लाह तआला ने फ़रमाया :

और जो इस्लाम के सिवा कोई दीन चाहेगा वो हरगिज़ उस से कुबूल न किया जायेगा, और वो आखिरत में जियाकारों से है । क्यूंकर अल्लाह ऐसी कौम कि हिदायत चाहे जो इमान ला कर काफिर हो गए और गवाही दे चुके थे कि रसूल सच्चा है और उन्हें खुली निशानियां आ चुकी थीं,
और अल्लाह जालिमो को हिदायत नही करता, उनका बदला ये है के उनपर लानत है अल्लाह और फरिश्तों और आदमियों की सबकी, हमेंशा उसमें रहें , न उन पर से अज़ाब हलका हो और न उन्हें मोहलत दी जाए. मगर जिन्होंने उसके बाद तौबा की और आप को संभाला तो जरुर अल्लाह बख्शनेवाला महेरबान है ।

बेशक़़ वो जो इमान ला कर काफिर हुए फिर और कुफ्र में बढे उनकी तौबा हरगिज़ कबूल नही होगी और वोही है बहके हुए. वो जो काफिर हुए और काफिर ही मरे उनमें किसीसे जमीन भर सोना हरगिज़ कबूल न किया जायेगा अगरचे अपनी खुलासी को दे, उन के लिए दर्दनाक अज़ाब है और उनका कोई यार नही.

( सूरह आल इमरान)

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और शिर्क वाली औरतों से निकाह न करो जब तक वो मुसलमान न हो जाएं और बेशक़ मुसलमान औरत (लड़की) मुशरिक औरते से अच्छी है भले ही मुशरिक लड़की तुम्हें पसंद हो । और लडकी को मुशरिकों के निकाह में न दो जबतक (मुशरिक लडका) वो ईमान न लाएं और बेशक मुसलमान गुलाम (यानी भले मुसलमान लडका गरीब हो कैसा भी दीखता हो) मुशरिकों से अच्छा है,

भले ही मुशरिक लडका बहोत खूबसूरत हो पैसे वाला हो लेकिन वो तुम्हें दोजख़ की तरफ बुलाते है और अल्लाह जन्नत औऱ बख्शिश की तरफ बुलाता है अपने हुक्म और आयतें लोगों के लिये बयान करता है कि कही वो नसिहत मानें ।

इमान लाने का मतलब है पूरी तरह से इस्लाम में दाखिल होना, और अल्लाह को एक मानना और रसूल अल्लाह की सुन्नत पे अमल करना

अगर अभी भी अल्लाह तआला के फरमाया हुआ कलाम पे आपको यकीन नही तो खुद सोचना और रोज़े कयामत के मंन्जर का ख़्याल करना जिसका वादा अल्लाह तआला ने किया है ।

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