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गुनाह लिखने वाला फरिश्ता इंसान के गुनाह को कब तक नहीं लिखता है ? पढ़िए ये हदीस

गुनाह लिखने वाला फरिश्ता इंसान के गुनाह को कब तक नहीं लिखता है ? पढ़िए ये हदीस

हदीस :
हज़रत अबू उमामा रज़ि० से रिवायत है कि आप (रसूलुल्लाह सल्लसल्लाहु अलैहि वसल्ल्म) ने इर्शाद फ़रमाया :

यकीनन बाएं तरफ का फरिश्ता गुनहगार मुसलमान के लिए छ : घड़ियां ( कुछ देर ) कलम को ( गुनाह के) लिखने से उठाए रखता है , यानी नहीं लिखता ।

फिर अगर यह गुनहगार बन्दा नादिम हो जाता है और अल्लाह तआला से गुनाह की माफ़ी मांग लेता है तो फरिश्ता उस गुनाह को नहीं लिखता , वरना एक गुनाह लिख दिया जाता है ।

( तबरानी , मज्मज़्ज़वाइद )

( मुन्तख़ब अहादीस सफा 364 )

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अल्लाह तआला हम सब को कहने , सुनने और पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाये और नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताये हुए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये अमीन |

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